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raabta

Posted by ritu garg on January 20, 2015 at 2:39pm 0 Comments

जो तुझसे नहीं राब्ता तो दुनिया से क्या वास्ता ---
पर यूं भी है कि
गर तुझसे हो राबता तो दुनिया से क्या वास्ता

तुमको मेरे मरने की ये हसरत ये तमन्ना / दाग़ देहलवी

Posted by Rina Badiani Manek on January 20, 2015 at 12:39pm 0 Comments

तुमको मेरे मरने की ये हसरत ये तमन्ना

अच्छों को बुरी बात का अरमाँ नहीं देखा



लो और सुनो, कहते हैं वो देख के मुझको

जो हाल सुना था वो परीशाँ नहीं देखा



तुम मुँह से कहे जाओ कि देखा है ज़माना

आँखें तो ये कहती हैं कि हाँ… Continue

हरिवंशराय बच्चन...

Posted by Juee Gor on January 20, 2015 at 5:06am 0 Comments

मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक

कविता लिखना चाहता हूँ।

चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों में

मेरे परों की रंगीनी है?'

मैंने कहा, 'नहीं'।…

Continue

दुआ जो मेरी बेअसर हो गई / इस्मत ज़ैदी

Posted by Rina Badiani Manek on January 20, 2015 at 4:28am 0 Comments



दुआ जो मेरी बेअसर हो गई

फिर इक आरज़ू दर बदर हो गई



वफ़ा हम ने तुझ से निभाई मगर

निगह में तेरी बेसमर हो गई



तलाश ए सुकूँ में भटकते रहे

हयात अपनी यूंही बसर हो गई



कड़ी धूप की सख़्तियाँ झेल कर

थी… Continue

અસંગતા : / જલકમલવત્ :

Posted by Janak Desai on January 19, 2015 at 7:24pm 0 Comments

કમળનું જતન કાદવમાં થતું હોવા છતાં, અંતે તેને, નિજ ના સદગુણો, ખૂબસૂરતી, કોમળતા અને માધુર્ય ને લઇ ને, દેવ મસ્તકે શોભવા મળે છે. કમળમાં અસંગતા નો ગુણ છે. કાદવ મધ્યે રહેવા છતાં, કાદવ તેને સ્પર્શી નથી શકતો. તે જ રીતે, પ્રણય પણ માનવ જીવનમાં, અનેક વિઘ્નો… Continue

ज़िद

Posted by ritu garg on January 19, 2015 at 2:43pm 0 Comments

तुम्हें जिद  न बुलाने की ///

और 

हमे जिद न भुलाने की////

दह्र के अंधे कुएँ में कसके आवाज़ लगा / इक़बाल साजिद

Posted by Rina Badiani Manek on January 18, 2015 at 3:35pm 0 Comments

दह्र के अंधे कुएँ में कसके आवाज़ लगा

कोई पत्थर फ़ेककर पानी का अंदाज़ा लगा



रात भी अब जा रही है अपनी मंज़िल की तरफ़

किसकी धून में जागता है, घर का दरवाज़ा लगा



काँच के बरतन में जैसे सुर्ख़ कागज़ का गुलाब

वह मुझे उतना… Continue

છાતી સરસાં ચાંપેલ સ્મરણો :

Posted by Janak Desai on January 18, 2015 at 9:00pm 0 Comments

ક્યારેક...

સાંજ ઢળ્યે,

ઘૂંઘટ સમ ક્ષિતિજ પછીત…

Continue

नाव में बहते -बहते / गुलज़ार

Posted by Rina Badiani Manek on January 18, 2015 at 4:36pm 0 Comments

नाव में बहते-बहते इक नज़्म मेरी पानी में गिरी और गलने लगी

काग़ज़ का पैराहन था

मेरी तहरीर न थाम सका



सियाही फैल गई पहले

फिर लफ़्ज़ गले, और एकएक करके डूब गये

टूटते मिसरों की हिचकी, कुछ दूर सुनाई दी और… Continue
 
 
 

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