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विश्वास करना चाहता हूँ / अशोक वाजपेयी

Posted by Rina Badiani Manek on January 25, 2015 at 6:34pm 0 Comments

विश्वास करना चाहता हूँ कि

जब प्रेम में अपनी पराजय पर

कविता के निपट एकांत में विलाप करता हूँ

तो किसी वृक्ष पर नए उगे किसलयों में सिहरन होती है

बुरा लगता है किसी चिड़िया को दृश्य का फिर भी इतना हरा-भरा होना

किसी नक्षत्र की गति… Continue

ઓરડો

Posted by Janak Desai on January 26, 2015 at 9:10pm 0 Comments

છે પારદર્શક તેથી જ તે કદી અંજાતું નથી,
ભીંતો ન હોવાથી જ, અંધારું બંધાતું નથી;
અંજાઉ છું જ્યારેય, હું ઓરડામાં જાઉં ત્યરે ,
તિરાડોમાં અજવાળું ક્યારેય ફસાતું નથી.

જનક

दयार-ए-दिल की रात में चिराग़ सा जला गया / नासिर काज़मी

Posted by Rina Badiani Manek on January 27, 2015 at 2:29am 0 Comments

दयार-ए-दिल की रात में चिराग़ सा जला गया

मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया



जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िदगी ने भर दिये

तुझे भी नींद आ गयी, मुझे भी सब्र आ गया



पुकारती हैं फ़ुर्सतें, कहाँ गयी वो… Continue

raabta

Posted by ritu garg on January 20, 2015 at 2:39pm 0 Comments

जो तुझसे नहीं राब्ता तो दुनिया से क्या वास्ता ---
पर यूं भी है कि
गर तुझसे हो राबता तो दुनिया से क्या वास्ता

तुमको मेरे मरने की ये हसरत ये तमन्ना / दाग़ देहलवी

Posted by Rina Badiani Manek on January 20, 2015 at 12:39pm 0 Comments

तुमको मेरे मरने की ये हसरत ये तमन्ना

अच्छों को बुरी बात का अरमाँ नहीं देखा



लो और सुनो, कहते हैं वो देख के मुझको

जो हाल सुना था वो परीशाँ नहीं देखा



तुम मुँह से कहे जाओ कि देखा है ज़माना

आँखें तो ये कहती हैं कि हाँ… Continue

हरिवंशराय बच्चन...

Posted by Juee Gor on January 20, 2015 at 5:06am 0 Comments

मैनें चिड़िया से कहा, मैं तुम पर एक

कविता लिखना चाहता हूँ।

चिड़िया नें मुझ से पूछा, 'तुम्हारे शब्दों में

मेरे परों की रंगीनी है?'

मैंने कहा, 'नहीं'।…

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दुआ जो मेरी बेअसर हो गई / इस्मत ज़ैदी

Posted by Rina Badiani Manek on January 20, 2015 at 4:28am 0 Comments



दुआ जो मेरी बेअसर हो गई

फिर इक आरज़ू दर बदर हो गई



वफ़ा हम ने तुझ से निभाई मगर

निगह में तेरी बेसमर हो गई



तलाश ए सुकूँ में भटकते रहे

हयात अपनी यूंही बसर हो गई



कड़ी धूप की सख़्तियाँ झेल कर

थी… Continue

અસંગતા : / જલકમલવત્ :

Posted by Janak Desai on January 19, 2015 at 7:24pm 0 Comments

કમળનું જતન કાદવમાં થતું હોવા છતાં, અંતે તેને, નિજ ના સદગુણો, ખૂબસૂરતી, કોમળતા અને માધુર્ય ને લઇ ને, દેવ મસ્તકે શોભવા મળે છે. કમળમાં અસંગતા નો ગુણ છે. કાદવ મધ્યે રહેવા છતાં, કાદવ તેને સ્પર્શી નથી શકતો. તે જ રીતે, પ્રણય પણ માનવ જીવનમાં, અનેક વિઘ્નો… Continue

ज़िद

Posted by ritu garg on January 19, 2015 at 2:43pm 0 Comments

तुम्हें जिद  न बुलाने की ///

और 

हमे जिद न भुलाने की////

दह्र के अंधे कुएँ में कसके आवाज़ लगा / इक़बाल साजिद

Posted by Rina Badiani Manek on January 18, 2015 at 3:35pm 0 Comments

दह्र के अंधे कुएँ में कसके आवाज़ लगा

कोई पत्थर फ़ेककर पानी का अंदाज़ा लगा



रात भी अब जा रही है अपनी मंज़िल की तरफ़

किसकी धून में जागता है, घर का दरवाज़ा लगा



काँच के बरतन में जैसे सुर्ख़ कागज़ का गुलाब

वह मुझे उतना… Continue
 
 
 

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