Rashmi Prabha
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Payal liked Rashmi Prabha's blog post इतना सहज था सबकुछ ?
Wednesday
Dhruvkumar Rana liked Rashmi Prabha's blog post बित्ते भर की थी सच की जमीन
Mar 17
Rashmi Prabha posted a blog post

इतना सहज था सबकुछ ?

ऐसे तो सहज ही रहती हूँबड़ी सहजता से बड़ी से बड़ी तकलीफ के क्षणों को शब्दों में बाँध देती हूँ लेकिन समानान्तर प्रलाप करते मस्तिष्क के कोनों से रेगिस्तानी आँखों से शून्य में अटके वक़्त से करती हूँ सवाल क्या सचमुच इतना ही सहज था सबकुछ ?मासूम भयभीत आँखें ममता के थरथराते पाँव और गंदगी के ढेर पर कोने में सिमटी उस लड़की की विवशता जो मैंने देखी है क्या उसका हिसाब-किताब इतना आसान है कि जोड़-तोड़ से उसका हल निकाल दिया जाए !!!.... हल तो हमने भी नहीं निकाला था वीरान राहों पर सपनों के अदृश्य दीये रखते हुए  बस मान…See More
Mar 15
Naresh Barot liked Rashmi Prabha's profile
Mar 15
Dr Sushil Kumar Joshi commented on Rashmi Prabha's blog post बित्ते भर की थी सच की जमीन
"सुन्दर।"
Mar 13
Rashmi Prabha posted a blog post

बित्ते भर की थी सच की जमीन

बित्ते भर की थी सच की जमीन ...पर झूठ की ईमारत बड़ी ऊँची बनी !एक एक कमरा शातिर और रहनेवाले लोग धुएं के छल्लों से जो होकर भी गुम हैं !कहते हैं बुद्धिजीवी की शक्ल में सभी कि बिना आग के धुंआ नहीं एक हाथ से ताली नहीं ...बित्ते भर की शक्ल में आम लोगों से पूछो कि किस तरह बिना आग के वे बुरी तरह झुलस गए किस तरह रेकॉर्डेड तालियाँ गूंजती रहीं और वे ...............न खुद पर बर्फ़ रख सके न कुछ बोल सके एक ही प्रश्न एक लगातार होते रहे जवाब सुनने के लिए कोई था ही नहीं तो चुप का धुंआ फैलता रहा !!!बित्ते भर की…See More
Mar 12
Rashmi Prabha posted a blog post

हमेशा .....

गलतफहमियां होती हैंपर स्व विश्लेषण करने परदृष्टि मस्तिष्क समय अनुभव ...ये सब ज्ञान का स्रोत बनते हैं !एक ही व्यक्ति सबके लिए - एक सा नहीं होताएक सा व्यवहार जब सब नहीं करतेतो एक सा व्यक्ति कैसे मिलेगा !पर प्रतिस्पर्द्धा लिएउसके निजत्व को उछालनाअपनी विकृत मंशाओं की अग्नि को शांत करनाक्या सही है ! ........पाप और पुण्य - !!!उसके भी सांचे समय की चाक पर भिन्न होते हैंजैसे -राम ने गर्भवती सीता को वन भेजा ...हम आलोचना करने लगेसोचा ही नहींकि हम राम होते तो क्या करतेयज्ञ में सीता की मूर्ति रखतेया - वंश…See More
Mar 11
Dr Sushil Kumar Joshi liked Rashmi Prabha's blog post मैं आज भी इसी मन्त्रोच्चार में लीन हूँ
Mar 11
Rashmi Prabha posted a blog post

मैं आज भी इसी मन्त्रोच्चार में लीन हूँ

तुम्हें क्या पताकितना चली हूँ मैं !एक ही समयतपती बर्फीली पहाड़ियों मेंचहकते शहरों मेंकभी सर सहलाया हैकभी तोतली ज़ुबान बोली हूँमाँ नानी दादी ...थककर भी - नहीं थकती है :)छुट्टियों के कार्यक्रमकल्पनाओं में रूप लेते रहते हैंयहाँ घूमेंगेएक दिन वो करेंगेवो जो छोटी सी दूकान है नवहाँ भी चलेंगे ...खाने के लिए ये,वो... छुट्टियाँ हिरण सी कुलांचे भरती हैकोई आ पाता हैकोई नहीं आ पातापूर्ववत होते अगली छुट्टियों का इंतज़ारऔर सोचना -जो रह गयावह इस बार ज़रूर होगा !शून्य में गढ़ती रहती हूँतुमसबों के पैरों की…See More
Mar 10
Rashmi Prabha is now a member of syahee.com
Mar 10

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Rashmi Prabha's Blog

इतना सहज था सबकुछ ?

Posted on March 15, 2017 at 4:56pm 0 Comments

ऐसे तो सहज ही रहती हूँ

बड़ी सहजता से 

बड़ी से बड़ी तकलीफ के क्षणों को 

शब्दों में बाँध देती हूँ 

लेकिन समानान्तर 

प्रलाप करते मस्तिष्क के कोनों से 

रेगिस्तानी आँखों से 

शून्य में अटके वक़्त से 

करती हूँ सवाल 

क्या सचमुच 

इतना ही सहज था सबकुछ ?

मासूम भयभीत आँखें 

ममता के थरथराते पाँव 

और गंदगी के ढेर पर 

कोने में सिमटी उस लड़की की विवशता 

जो मैंने देखी…

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बित्ते भर की थी सच की जमीन

Posted on March 12, 2017 at 7:36pm 1 Comment

बित्ते भर की थी सच की जमीन ...

पर झूठ की ईमारत बड़ी ऊँची बनी !

एक एक कमरा शातिर

और रहनेवाले लोग धुएं के छल्लों से

जो होकर भी गुम हैं !

कहते हैं बुद्धिजीवी की शक्ल में सभी

कि बिना आग के धुंआ नहीं

एक हाथ से ताली नहीं ...

बित्ते भर की शक्ल में आम लोगों से पूछो

कि किस तरह बिना आग के वे बुरी तरह झुलस गए

किस तरह रेकॉर्डेड तालियाँ गूंजती रहीं

और वे ...............

न खुद पर बर्फ़ रख सके

न कुछ बोल सके

एक ही प्रश्न एक लगातार होते रहे…

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हमेशा .....

Posted on March 11, 2017 at 6:41pm 0 Comments





गलतफहमियां होती हैं

पर स्व विश्लेषण करने पर

दृष्टि मस्तिष्क समय अनुभव ...

ये सब ज्ञान का स्रोत बनते हैं !

एक ही व्यक्ति 

सबके लिए 

- एक सा नहीं होता

एक सा व्यवहार जब सब नहीं करते

तो एक सा व्यक्ति कैसे मिलेगा !

पर प्रतिस्पर्द्धा लिए

उसके निजत्व को उछालना

अपनी विकृत मंशाओं की अग्नि को शांत करना

क्या सही है ! ...

.....

पाप और पुण्य -…

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मैं आज भी इसी मन्त्रोच्चार में लीन हूँ

Posted on March 10, 2017 at 6:02pm 0 Comments

तुम्हें क्या पता

कितना चली हूँ मैं !

एक ही समय

तपती बर्फीली पहाड़ियों में

चहकते शहरों में

कभी सर सहलाया है

कभी तोतली ज़ुबान बोली हूँ

माँ नानी दादी ...

थककर भी - नहीं थकती है :)

छुट्टियों के कार्यक्रम

कल्पनाओं में रूप लेते रहते हैं

यहाँ घूमेंगे

एक दिन वो करेंगे

वो जो छोटी सी दूकान है न

वहाँ भी चलेंगे ...

खाने के लिए ये,

वो

... छुट्टियाँ हिरण सी कुलांचे भरती…

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sincere love

Posted by Arpana Bina Vora on March 22, 2017 at 4:32pm 0 Comments

SINCERE LOVE

Is love’s paradise actual?

Candid and dear??

Indesigning and upfront??

Regular and unaffected??

Yes,what women love

First make the truffles,

I just want to let her know

She mean the world to…

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SHE -THE WARRIOR

Posted by Arpana Bina Vora on March 22, 2017 at 4:30pm 0 Comments

SHE-THE WARRIOR

Looking deep down the mirror and I said ‘ I love you’

Immediately an electic current ripples throughout my soul,

I be in my own skin,

Longer than in anywhere else,

I always promise myself

“you…

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SOUL LOVE

Posted by Arpana Bina Vora on March 22, 2017 at 4:28pm 0 Comments

Soul love

I have not fallen in the love of body

But merely wwith a soul,

And it makes a difference..

And then my soul saw you and

It kind of went on ‘oh there you are I have been looking

For you.’

He was…

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It takes it personally when you do commit a personal offense

Posted by narendrasinh chauhan on March 22, 2017 at 1:44pm 0 Comments

It takes it personally when you do commit a personal offense

Continue

Economical Moving with Packers and Movers in Gurgaon

Posted by raj malhotra on March 22, 2017 at 6:36am 0 Comments

 

House is just a place that is constructed of bricks but house is made of love. Along side enjoy you can find so a number of other things that are needed to make home a great place for living and these essential things of the…

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સ્વર્ગ પર હિસાબ !

Posted by pravin patel on March 21, 2017 at 6:40pm 0 Comments

મૃતાત્માઓ સ્વર્ગના પ્રવેશદ્વારે લાઈનમાં ઉભા હતા !



ધર્મરાજે પ્રથમ ઉભેલા મૃતાત્માને પૂછ્યું " તમે કોણ હતા ? "



મૃતાત્માએ કહ્યું " મહારાજ હું એક ટેક્ષી ચાલક હતો વર્ષો સુધી ટેક્ષીમાં મુસાફરોને તેઓના ઈચ્છીત સ્થળે મુકી આવતો હતો !… Continue

ગઝલ

Posted by Manisha joban desai on March 21, 2017 at 3:56pm 1 Comment

હેપ્પી વિશ્ર્વ કવિતા દિવસ 2017...

આંખથી જે રંગ છલ્કયા યાદ છે?

ને,પછી જે રંગ બદલ્યા યાદ છે?

લાલ લીલો વાદળી ને જાંબલી,

દિલમા જે મેઘ વરસ્યા યાદ છે?

કાન-રાધા ગાઇ સંગે રાગ જે,

લોક…

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THE CONCERN!!!

Posted by Payal on March 20, 2017 at 1:33am 0 Comments

The stars are willing to fall on the

Blank paper of earth

And wanting to write an unending poem of

Love , care and share:



But the sky is holding them tight

Aware of the difficulties lying

Beneath the look of… Continue

WAR WITHIN ME!!!

Posted by Payal on March 19, 2017 at 8:07am 0 Comments

The lights went dark

I hid myself within me..

Had made up mind to fight the loneliness

Was determined to win the conquest of solitude

Will I win the war within me..?





The truth that

Solitude is… Continue

દોસ્તી,दोस्ती,Friendship

Posted by Dhruvkumar Rana on March 18, 2017 at 9:26pm 0 Comments

મસ્તી -મસ્તીમાં થઈ ગઈ દોસ્તી, દોસ્તો : આ દોસ્તી છે ઘણી સસ્તી, પણ રસ્તામાં પડી નથી મળતી,લાગણીઓની મજૂબત દોરે બંધાય છે આ દોસ્તી, હસાવે અને રડાવે પણ છે આ દોસ્તી, સુખમાં મજા અને દુ:ખમાં સાથ પણ અપાવનારી છે આ દોસ્તી, દોસ્તીની આ જ વાત તો છે બહુ નિરાલી તેમાં… Continue

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